विराट व्यक्तित्व के महान सर्जक थे अज्ञेय : प्रो. दुबे

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झांसी। आधुनिक हिन्दी साहित्य के महत्वपूर्ण हस्ताक्षर कवि, लेखक, पत्रकार, स्वतन्त्रता सेनानी अज्ञेय की जयन्ती पर बुंदेलखंड विश्वविद्यालय, झाँसी के हिन्दी विभाग में एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया।
कुलपति प्रोफेसर सुरेन्द्र दुबे ने अज्ञेय को विराट व्यक्तित्व के महान सर्जक की संज्ञा देते हुए कहा कि अज्ञेय कुशीनगर के एक अस्थायी शिविर में पैदा हुए, जहाँ उनके पिता हीरानन्द शास्त्री पुरातात्विक उत्खनन कर रहे थे। यह भी एक संयोग है कि जिस दिन उत्खनन में भगवान बुध्द की अस्थियाँ और दाँत मिले, उसी दिन अज्ञेय ने पहली किलकारी ली। तत्कालीन दलाई लामा ने टीका लगाकर उन्हें आशीर्वाद दिया था, कालांतर में वे एक श्रेष्ठ कवि लेखक के रूप में हिन्दी साहित्य की दिशा निर्धारित करने वाले रचनाकार के रूप में हमारे सामने आए। उनका रचना संसार बहुविध है और सामाजिक परिदृश्य की समकालीनता का संवाहक है। कार्यकारी विभागाध्यक्ष डॉ पुनीत बिसारिया ने अज्ञेय की विभिन्न रचनाओं की चर्चा करते हुए कहा कि भारतेन्दु के बाद अज्ञेय ने हिन्दी साहित्य को युगानुरूप नवीन प्रतिमान, उपमान, कथ्य और तथ्य दिए।
आधुनिकता का द्वितीय प्रस्फुटन अज्ञेय द्वारा ही सम्भव हो सका। डॉ अचला पाण्डेय ने अज्ञेय की कविताओं की चर्चा करते हुए उनके कवि रूप पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम का संचालन अंजनी कुमार उपाध्याय ने किया। शोधार्थी संजय कुमार ने सभी के प्रति आभार जताया। इस अवसर पर डॉ डी के भट्ट, डॉ सौरभ श्रीवास्तव, डॉ आंजनेय शर्मा, डॉ विजय यादव, डॉ अंकित श्रीवास्तव, नितेश कुमार सिंह, रुचि श्रीवास्तव, नेहा, दीपा आदि उपस्थित रहे।

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