नारी को नमन : परिवार की देखभाल के साथ करती हैं यह सभी समाजसेवा (भाग 5)

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खुद बेटी थीं और विवाह के बाद तीन बेटियाेें की मां, फिर भी न मानी हार

जेसीआई से जुड़ी एक ऐसी महिला, जिनको परिवार का साथ मिला पर पुरुष प्रधान समाज की धारणा के चलते मजबूरी का सामना भी किया। रुढ़िवादी समाज में तीन तीन बेटियों को जन्‍म दिया और आज एक सफल समाज सेविका के रुप में समाज में अपनी पहचान बना चुकी हैं। यह हैं जेसीआई गूंज की निवर्तमान अध्‍यक्ष योगिता अग्रवाल।
अपनी कहानी श्रीमती अग्रवाल बताती हैं कि मेरा बचपन ललितपुर मे बीता। पाँच भाई बहनों में सबसे छोटी होने के कारण हंसमुख स्वभाव की रही। पापा की लाड़ली, नेतृत्व का गुण मैने अपने पापा से सीखा, माँ मेरी ज्यादा पढ़ीलिखी ना होने के बावजूद मेरी हर बात समझती और जरूरत पढ़ने पर मेरी ढाल बन जाती। वक्त ने जब करवट बदली मैं बुरे दौर से गुजरी 2 साल का पढ़ाई में गेप होने के बाद गंजबासौदा से MSc की पढ़ाई की, इसी बीच मेरी शादी हो गई। शादी भी एेसे घर में जहां महिलाओं का ज्यादा निकलना अच्छा नही माना जाता था। फिर जिदंगी बच्चों और पति में व्यस्त हो गई, लेकिन एक कसक अन्दर रह गई कि इतनी पढ़ाई का क्या फायदा जब यही सब करना है। तब मैने समाज सेवा के क्षेत्र में कार्य करना शुरू किया। 2015 में मैंने जेसीआई क्लासिक की विंग चेयरपर्सन का पदभार ग्रहण किया। इसी बीच मुझे मेरी तीसरी प्रेग्नेंसी का पता चला, पर मै घबराई नहीं। आठवें महीने तक भी मैने अपना 100% समय अपनी संस्था को दिया और नेशनल से बेस्ट विंग चेयरपर्सन का अवार्ड जीता।
राह मिल चुकी थी, अब कदम बढ़ाना था, मैंने 2016 मेें जेसीआई झाँसी गूंज की नींव रखी और मेरे साथ 10 से शुरू हुआ यह सफर 100 से ऊपर सथियों पर पहुंच गया है। मेरे साथ जुड़ी प्रत्येक महिला सामाजिक कार्यों में अपना योगदान दे रही है। मुझे आज खुद पर भी गर्व होता है कि मैं अपनी तीनों बेटियों के लालन पालन में कोई कमी नहीं करती। पति और परिवार के साथ सामंजस्य और अपने सामाजिक कार्य सभी के लिए समय निकाल लेती हूँ ।
मै आज महिला दिवस पर अपने सभी साथियों को कहना चाहूँगी कि *स्वयं को पहचान,,,तुझ में शक्ति अपार है,,,स्वयं को नमन कर और आगे बढ़ चल,,,ठोकर मार उसे जो तेरा सम्मान करना न जाने,,,बढ़ चल, बढ़ चल, नई राहें तेरा रस्ता ताके हैं,,तेरे आंचल में हैं अपार खुशियां,,आज नारी शक्ति का दिन है!!*

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