निजी अस्पतालों की मनमानी पर रोक लगाने को बने उचित कानून

बुविवि के पत्रकारिता संस्थान में विश्व क्षय रोग दिवस पर विशेष कार्यक्रम में उठी मांग

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झांसी। बुन्‍देलखण्‍ड विश्वविद्यालय के जनसंचार एवं पत्रकारिता संस्थान में विश्व क्षय रोग दिवस पर आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में विद्यार्थियों को सेहत की रक्षा और जनजागरण के तौर तरीके बताए गए। इस कार्यक्रम में निजी अस्पतालों की मनमानी पर रोक लगाने के लिए प्रदेश सरकार से जल्द उचित कानून बनाने की मांग बुलंद की गई।
यह कार्यक्रम संस्थान के प्रमुख डाॅॅ. सीपी पैन्यूली के निर्देशन में आयोजित किया गया। सबसे पहले शिक्षक राघवेंद्र दीक्षित ने विश्व क्षय दिवस के बारे में विद्यार्थियों को जानकारी दी। उन्होंने क्षय रोग के कारणों और उनसे बचाव के उपायों की विस्तार से जानकारी दी। इसके बाद बीए तृतीय वर्ष के विद्यार्थी रजत गुप्ता ने कहा कि क्षय रोग के बारे में लोगों को और अधिक जानकारी देने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि मीडिया जनजागरण में और प्रभावी भूमिका निभाए तो बात बने। बीए प्रथम वर्ष के विद्यार्थी अनवर कासिम ने कहा कि आज समाज में साक्षरता की दर तो बढ़ रही है लेकिन स्वास्थ्य और अन्य सामाजिक समस्याओं के प्रति लोगों में जागरूकता का अभाव है। अज्ञानता क्षय रोग के उन्मूलन में सबसे बड़ी बाधा बन रही है। उन्होंने युवाओं का आहवान किया कि वे खुद चैतन्य रहें और दूसरों को भी जागरूक करें। इस कार्यक्रम में तृतीय वर्ष के विद्यार्थी ऋषि दीक्षित ने एक कविता के माध्यम से स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति सरकार की उदासीनता को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि सरकारी अस्पतालों में व्याप्त अव्यस्थाओं के चलते लोग निजी अस्पतालों की शरण लेने को मजबूर हो रहे हैं। छात्रा प्रतीक्षा गुप्ता ने स्वास्थ्य सेवाओं में निजीकरण के बढ़ते प्रभावों का उल्लेख करते हुए कहा कि आम लोगों की जागरूकता में कमी के कारण सरकारें इस ओर अपेक्षित ध्यान नहीं दे रही हैं। अस्पतालों में उचित संसाधनों और दवाइयों का अभाव होने की वजह से आम आदमी को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने युवाआें से सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की निरंतर निगरानी करने और इसके बारे में सरकार को उचित फीडबैक देने का आह््वान किया। इस कार्यक्रम में बीए प्रथम वर्ष के विद्यार्थियों मोहित प्रजापति, डॉली पाण्डेय और चंचल गुप्ता ने भी अपने विचार रखे। इन सभी ने कहा कि सरकार को निजी अस्पतालों के चिकित्सकों की मनमानी पर रोक लगाने के लिए उचित कानून बनाना चाहिए। निजी अस्पतालों के चिकित्सकों की अधिकतम फीस की सीमा भी निर्धारित की जानी चाहिए। यह भी तय होना चाहिए कि निजी अस्पताल भी गरीबों का इलाज करने से इनकार न कर सकें। एमए के विद्यार्थियों पुष्पेंद्र और सत्यपाल सिंह ने कहा कि जनजागरण में मीडिया को और सकारात्मक भूमिका का निर्वहन करना चाहिए।
शिक्षक अभिषेक कुमार ने भी क्षय रोग के कारणों की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने इस रोग के प्रति और व्यापक जन जागरण अभियान चलाने पर बल दिया। शिक्षक उमेश शुक्ल युवाओं को क्षय रोग के उन्मूलन के लिए सरकार की ओर से उठाए गए कदमों की जानकारी दी। उन्होंने युवाओं का आह्वान किया कि वे सरकारी योजनाओं की निगरानी संजीदगी से करें। समय समय पर मीडिया के माध्यम से योजनाओं की स्थितियों के बारे में सरकार को अवगत कराते रहें।
इस कार्यक्रम में शिक्षक सतीश साहनी, विद्यार्थी मानवी गंगेले, भरत सिंह, सौरभ राय, स्वस्ति साहू, सौम्या वर्मा, दीपक पासवान, हर्षित सागर, प्रणव शर्मा, राजकुमार यादव, मो. महताब, शालू कुमारी, कृतिका खटवानी, पारस पाठक आदि उपस्थित रहे।

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