जैव तकनीक का मानव के हित में हो उपयाेेग : प्रो. श्रीवास्तव

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झांंसी। जैव तकनीक का भविष्‍य उज्जवल है तथा इसमें शोध की अपार सम्भाावनाएं निहित हैं। आज आवश्‍यकता इस बात की है कि इस तकनीक का मानव के हित में उपयोग हो। यह विचार बुन्देलखण्ड विश्‍वविद्यालय में जैव-तकनीकी अभियांत्रिकी विभाग द्वारा उप्र उच्च शिक्षा आयोग के सहयोग से दो दिवसीय करेण्ट सेनेरियो एण्ड फ्यूचर ट्रेण्ड इन बायोफ्यूचरिटी विषयक बायोफ्यूचरिटी-2018 नामक राष्‍ट्रीय संगोष्‍ठी के समापन के अवसर पर आईआईटी बनारस हिन्दू विश्‍वविद्यालय के प्रो. एसके श्रीवास्तव ने व्यक्त किये।
समापन के अवसर पर सर्वप्रथम संगोष्‍ठी के संयोजक इंजी. ब्रजेन्द्र शुक्ला ने संगोष्‍ठी की उपलब्घियों को प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि संगोष्‍ठी में जैव तकनीक के विभिन्न आयामों पर कुल 12 आमंत्रित व्याख्यान तथा 13 शोध पत्र प्रस्तुत किये गये। एमिटी विश्‍वविद्यालय नोयडा की डा. गौरी मिश्रा तथा एचबीटीआई कानपुर के डा0 ललित सिंह ने विचार व्‍यक्‍त किए। संचालन इंजी ब्रजेश शुक्ला ने किया तथा आभार इंजी. दिनेश द्विवेदी ने व्यक्त किया। इससे पूर्व प्रातःकालीन सत्र डा. अंजू बाजपेई, डा. भानुमति सिंह, डा. सुमिरन श्रीवास्तव, डा. एसवी सिंंह, डा. ब्रजेश सिंह, डा. गार्गी मिश्रा, डा. ललित सिंह, डा. मुथ्थु कुमार ने शोधपत्रों को प्रस्तुत किया। गांघी सभागार में बुन्देलखण्ड विश्‍वविद्यालय परिसर में अभियांत्रिकी एवं तकनीकी संस्थान के अन्तर्गत संचालित जैव-तकनीकी अभियांत्रिकी विभाग द्वारा उप्र उच्च शिक्षा आयोग के सहयोग से दो दिवसीय करेण्ट सेनेरियो एण्ड फ्यूचर ट्रेण्ड इन बायोफ्यूचरिटी विषयक बायोफ्यूचरिटी-2018 राष्‍ट्रीय संगोष्‍ठी का उद्घाटन आईजीएफआरआई के निदेशक डा. आरवी कुमार ने किया। उन्होंने कहा कि जैव तकनीक की सहायता से जानवरों के लिए प्रयुक्त होने वाले चारे को अधिक प्रोटीनयुक्त बनाने में सहायता कर सकती है। आईआईटी बनारस हिन्दू विश्‍वविद्यालय के प्रो. एसके श्रीवास्तव ने दवाओं द्वारा मनुष्‍यों के जीवन सुधार में जैव तकनीकी के महत्व पर प्रकाश डाला।
बुन्देलखण्‍ड विश्‍वविद्यालय के कुलपति प्रो. सुरेन्द्र दुबे ने कहा कि जैव तकनीकी सहायता से खाद्य पदार्थो तथा कृषि के क्षेत्र में प्रयाेेग कर मानव जीवन स्तर में अपेक्षित सुधार लाया जा सकता है। उन्हाेंंने जैव तकनीशियनों से इस दिशा में अपेक्षित शाेेध कार्य करने की अपील भी की।
बीज वक्तव्य देते हुए उप्र वैज्ञानिक एवं तकनीकी परिषद के उप निदेशक डा. सीपी द्विवेदी ने कहा कि मानव जीवन में जैव तकनीक के प्रयाेेग से काफी सुधार लाया जा सकता हैैै। संचालन डा.जाकिर अली, डा.ब्रजेन्द कश्‍यप तथा डा. पल्लवी पुुुुष्‍प ने किया। इन अवसर पर इंजी. मुकुल सक्सेना, इंजी. दिनेष द्विवेदी, इंजी. ब्रजेन्द्र कश्‍यप, इंजी महेन्द्र प्रताप सिंंह, डा. आनन्द पाण्डेय, डा. गौरव श्रीवास्तव, डा. गौरव चौधरी, डा. बीबी निरंजन, डा. एपीएस गौड, डा. बीपी गुप्ता. डा. ललित गुप्ता, इंजी. विजय वर्मा, इंजी. नौशाद सिद्दीकी, इंजी. लाखन सिंह, इंजी. राहुल शुक्ला, इंजी. शशिकान्त राय, इंजी0 अंजिता श्रीवास्तव आदि उपस्थित रहे।

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