ई-लर्निगं कोे दिया जायेगा बढावा: प्रो.वैशम्पायन

बी.यू. में मूक पर आयोजित दो दिवसीय कार्यशाला का हुआ समापन

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झांसी। देश में शिक्षा के क्षेत्र में संसाधनों की कमी के कारण भारत जैसे विशाल देश में सभी के लिए शिक्षा प्रदान करना वास्तव में एक दुरूह एवं लगभग असम्भव कार्य है। तकनीकी विकास के युग मंे ई-लर्निगं के द्वारा ही यह सम्भव हो सकता है कि देश के प्रत्येक नागरिक को शिक्षा प्रदान की जा सके। विश्वविद्यालय का प्रयास होगा कि बुन्देलखण्ड क्षेत्र में भी ई लर्निगं से शिक्षा का प्रचार प्रसार किया जाय। यह विचार आज बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो.जे.वी.वैशम्पायन ने व्यक्त किये। प्रो.वैशम्पायन आज बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय परिसर के गणित एवं कम्प्यूटर विज्ञान संस्थान के सभागार में विश्वविद्यालय की आई.क्यू.ए.सी. सैल एवं पण्डित मदनमोहन मालवीय राष्ट्रीय मिशन फाॅर टीचिंग एण्ड टीचर्स के संयुक्त तत्वाधान में गुरू अंगददेव टीचिगं एण्ड लर्निगं सेन्टर, नई दिल्ली के सहयेाग से आयोजित ‘ब्लाईण्डेड लर्निगं एण्ड आई.सी.टी. आॅन टीचिंग’ विषय पर आयोजित दो दिवसीय कार्यशालाके समापन के अवसर पर उपस्थित प्रतिभागियेां को संबोधित कर रहे थे। कुलपति ने कहा कि उनका प्रयास होगा कि बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय में भी इस प्रकार का पााठ्यक्रम प्रारम्भ किये जायें तथा विश्वविद्यालय में भवष्य में इसक प्राकर की कार्यषालांए आयेाजित होती रहेगीं।
आज कार्यशाला के दूसरे दिन प्रातःकालीन सत्र में स्प्रेडशीट को एक सांख्यिकीय टूल के रूप में किस प्रकार प्रयेाग किया जा सकता है इस विषय पर प्रो.के.बी.भानुमति ने व्याख्यान दिया। उसके पश्चात उन्होंने रिसर्च राईटिंग टून तथा उनके अनुप्रयेागों पर उदाहरणों सहित चर्चा की। भोजनाकाश के पश्चात हुए तकनीकी सत्र में डा.अरूण जुल्का ने शोध में प्लेगेरिज्म के तहत आने वाली विभिन्न सामग्रियों को चैक करने की विभिन्न विधियेां का वर्णन किया तथा काॅपीराईट के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की।
उल्लेखनीय है कि कल प्रातःकाल के उद्घाटन सत्र में गुरू अंगददेव टीचिगं एण्ड लर्निगं सेन्टर, नई दिल्ली के उपाध्यक्ष प्रो.के.बी.भानुमति मुख्य अतिथि थे तथा उन्होंने इस दिशा में भारत सरकार द्वारा चलाई जा रही विभिन्न योजनाओं के बारे में विस्तारपूर्वक जानकारी दी। उन्होंने भारत सरकार की महत्वाकांक्षी परियोजना पी.एम.एम.एन.एम.टी.टी. के बारे में जानकारी दी। कार्यशाला को गुरू अंगददेव टीचिगं एण्ड लर्निगं सेन्टर के अध्यक्ष प्रो. ए.के.वक्शी तथा संयुक्त निदेशक प्रो. विमल रार ने भी स्काईप के माध्यम से सम्बेधित किया। इसके पश्चात हुए तक्नीकी सत्र में दिल्ली विश्वविद्यालय के डा.अरूण जुल्का ने अपने व्याख्यान में शिक्षकों हेतु उच्च शिक्षण तकनीक के प्रयोग समझाये तथा पाठ्यक्रमों में सम्मिलित आन्तरिक मूल्यंाकन, बहुविकल्पीय प्रश्नपत्र निर्माण के तरीके बताये।
कार्यक्रम का संचालन डा.रामबीर संह ने किया तथा अतिथियेां का आभार विश्वविद्यालय की आई.क्यू.ए.सी. सैल की समन्वयक डा.यशोधरा शर्मा ने व्यक्त किया।
इस अवसर पर वरिष्ठ आचार्य प्रो.वी.के.सहगल, प्रो.सुनील काबिया, संकायाध्यक्ष विज्ञान प्रो.एम.एम.ंिसंह, प्रो.प्रतीक अग्रवाल सहित सभी विभागों के शिक्षक एवं शिक्षिकाएं उपस्थित रहे।

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