रेलवे स्टेशनों पर चलेगा बाल सुरक्षा अभियान

रेलवे स्टेशनों पर चलेगा बाल सुरक्षा अभियान

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झाँसी। रेलवे सुरक्षा बल द्वारा मुसीबत में फंसे बच्चों की सहायता के लिए चलाए जा रहे अभियान की सफलता को देखते हुए रेल मंत्रालय ने निर्णय लिया है कि वह इस अभियान को मौजूदा स्टेशनों के साथ अतिरिक्त रेलवे स्टेशनों पर भी चलाएगी। इन अतिरिक्त रेलवे स्टेेशनों पर बाल सुरक्षा अभियान चलाने से अब यह अभियान कुल दर्जनों रेलवे स्टेशनों पर चलाया जाएगा। ए1 श्रेणी के स्टेशनों को इस अभियान के तहत शामिल किया जाएगा। ‘ऑपरेशन मुस्कान’ लापता बच्चों के बचाव और पुनर्वास के लिए गृह मंत्रालय द्वारा चलाई गई एक प्रमुख पहल है। यह एक समर्पित अभियान है जहां पुलिस संगठन गुमशुदा बच्चों की खोज और बचाव के लिए विभिन्न कार्य योजनाओं के जरिए ऐसे बच्चों को उनके परिवार से मिलाता है। रेलवे पुलिस और रेलवे सुरक्षा बल बचाव के उपाय करती है और रेल गाड़ियों और रेलवे परिसरों में ऐसे गुमशुदा बच्चोंं की सहायता करती है जिन्हें संरक्षा और सहायता की जरूरत होती है।

कई बच्चों को मानव तस्करी से बचाया

वर्ष 2014, 2015 व 2016 के दौरान रेलवे सुरक्षा बल के कार्मिकों ने 232 बच्चों का बचाव किया इनमें 86 ऐसे बच्चे थे जो मानव तस्करी में फंसे थे। इनमें 52 लड़के और 34 लड़कियां शामिल थीं। वर्तमान वर्ष 2017 में 120 बच्चों को रेलवे सुरक्षा बल ने मुक्त कराया है। इनमें 42 ऐसे बच्चे थे जो मानव तस्करी के जाल में फंसे थे, इनमें 28 लड़के और 14 लड़किया शामिल हैं। वर्तमान में रेल सुरक्षा बल के वरिष्ठ मंडल सुरक्षा आयुक्त आशीष मिश्रा के निर्देशन पर स्टेशन पोस्ट प्रभारी निरीक्षक राजीव उपाध्याय, उपनिरीक्षक नंदलाल मीना, विकास पंचोली के नेतृत्व में अभियान जारी है। बताते हैं कि रेलवे सुरक्षा बल प्रतिदिन रेल गाड़ियों और रेल परिसरों से दो – तीन ऐसे बच्चों को उनके माता-पिता, रिश्तेंदारों अथवा स्वयंसेवी संगठनों के सुरक्षित हाथों में सौंप रही है। ये बच्चे कानून द्वारा स्थापित बाल कल्याण समितियों और कानूनी पुनर्वास संस्थानों को भी सौंपे जाते हैं। यह कल्यााणकारी कार्य करके प्रति वर्ष रेलवे सुरक्षा बल के कर्मियों ने हजारों दुखी और हताश माता-पिता और रिश्तेदारों के चेहरे पर मुस्कान वापस लौटाई है।

फिर चलेगा मुस्कान अभियान

सूत्रों का कहना है कि परिणामस्वरूप ‘मुस्कान अभियान’ के तहत लापता बच्चों के बचाव के लिए चलाए जा रहे अभियान के अंतर्गत रेलवे सुरक्षा बल द्वारा किए जा रहे अथक प्रयासों और त्‍वरित मानवीय कदमों को देखते हुए गृह मंत्रालय ने रेल सुरक्षा बल को उल्‍लेखनीय सेवा के लिए पुरस्कार से सम्मानित किया है। चिन्हित रेलवे स्टेाशनों पर विशेष बूथ और बाल सहायता स्थल बनाए गए हैं। यहां पर रेलवे सुरक्षा बल के कर्मचारी 24 घंटे तैनात रहते हैं। इनके अलावा महिला व बाल विकास मंत्रालय द्वारा नामांकित स्वयंसेवी संगठन और बाल सहायता से संबद्ध कर्मचारी भी तैनात रहते हैं। यह सेवा रेलवे के लिए मानदंड संचालन प्रक्रिया के तहत चलाई जाती है ताकि रेलवे परिसरों और गाड़ियों में इस प्रकार के जरूरतमंद बच्चों को सहायता और संरक्षण प्राप्त हो सके। यह सेवा रेल मंत्रालय राष्ट्रीय बाल अधिकार सुरक्षा कमिशन (एनसीपीसीआर) व महिला व बाल विकास मंत्रालय संयुक्त रूप से चला रहा है।

यह हैं पृष्ठभूमि

बड़ी संख्या में घर से भागे हुए, माता-पिता से बिछुड़े हुए और मानव तस्करी में शामिल बच्चे देश के विभिन्न् भागों में यात्रा करते पाए जाते हैं। रेलवे ऐसे बच्चों की सहायता करती है और कई रेलवे परिसरों में ही उनको शरण देती है और उनके जीवन-यापन करती है। ये बच्चे हिंसा, शोषण और उपेक्षा के शिकार होते हैं। रेलवे सुरक्षा बल का लक्ष्य् ऐसे लाखों बच्चों की सुरक्षा करना है जो अपना रास्ता भटक कर माता-पिता से बिछुड़ गए हैं। यह बल ऐसे बच्चों की तस्करी रोकने के लिए समर्पित है और समय पर उपर्युक्त कार्रवाई करके बच्चोंं का बचाव करती है।

3872 की गिरफ्तारी कर लाखों की वसूली

पिछले वर्ष की तुलना में 8.9 फीसदी अधिक गिरफ्तारी, हर क्षेत्र में रही प्रगति
झाँसी। बीते वर्ष 2017 में रेलवे परिसर से रेलवे एक्ट 1989 के अंतर्गत अलग-अलग धाराओं में झाँसी रेलवे स्टेशन पर 3872 व्यक्तियों को गिरफ्तार किया गया एवं दंड के रूप में लाखों रूपये की वसूली की गयी।
रेल सुरक्षा बल की झाँसी स्टेशन पोस्ट ने वर्ष 2017 में अच्छा गुडवर्क किया है। इस गुडवर्क में रेलवे एक्ट की धारा 162 के अंतर्गत 1099 व्यक्तियों की गिरफ्तारी हुई। यह धारा महिला सुरक्षा से संबंधित है। महिला के लिये आरिक्षत कोच में यदि पुरुष यात्रा कर रहे हैं तो इस धारा के अंतर्गत कार्रवाई की जाती है। रेलवे परिसर में हंगामा करने व अशांति फैलाने, गंदगी फैलाने वाले 230 लोगों पर धारा 145 के अंतर्गत कार्रवाई की गयी है। अवैध वेंडर को रेलवे परिसर में शून्य करना एक चुनौती है तथापि इनके विरुद्ध लगातार कार्यवाही की जाती एवं धारा 144 के अंतर्गत 560 अवैध वेंडर पर कार्यवाही की गई। इसी प्रकार बिना किसी समुचित कारण के अलार्म चैन खींचने वाले 250 लोगों पर कार्रवाई हुई। धरना, प्रदर्शन कर ट्रेन के परिचालन में बाधा में 30, फुट बोर्ड पर यात्रा करने वाले 36, धूम्रपान करने वाले 825, ट्रेन पर पत्थर फेंकने वाले दो, ट्रेसपास करने वाले 1358 लोगों पर विभिन्न धाराओं के अंतर्गत कार्रवाई की गयी।

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