रेलवे इंजिनियर्स ने की श्रम संगठनों से अलग कर राजपत्रित दर्जे की मांग

सातवें वेतन आयोग की विसंगति दूर न होने पर नाराजगी

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झाँसी ! रेलवे बोर्ड ने संरक्षा समितियों की शिफारिशों को अनदेखा कर अभी तक इन संस्तुतियों को लागू करने की जहमत नहीं उठाई है।
7वें वेतन आयोग की विसंगतियों एवं ग्रुप-बी की मांग को अभी तक पूरी न होने से इंजीनियरों में काफी नाराजगी है।

अखिल भारतीय रेल अभियंता महासंघ के आह्वान पर शुक्रवार को विभिन्न जोनल रेलवे इंजीनियर्स असोसिएशनो ने राजपत्रित दर्जे सहित कई मांगों को लेकर डीआरएम व जी एम कार्यालयों पर धरना प्रदर्शन किया। इस मिशन सेफ्टी के नाम पर किये प्रदर्शन में इंजीनियर्स ने जस्टिस सीकरी, खन्ना, वांचू कमिटी की रिपोर्ट को लागू करने की मांग की। वहीं, दूसरी ओर उन्होंने मांगों की अनदेखी करने पर आंदोलन करने की चेतावनी दी।

उत्तर रेलवे के डीआरएम कार्यालय पर आयोजित सभा में आल इंडिया रेलवे इंजीनियर्स फेडरेशन के महासचिव इं ए के त्यागी ने कहा कि इंजिनियरों को मजदूर यूनियन से अलग रखने के बारे में जस्टिस खन्ना, जस्टिस वांचू व जस्टिस सीकरी कमिटी की रिपोर्ट व पुखरायां रेल दुर्घटना पर बनी टास्क फोर्स ऑन सेफ्टी रिपोर्ट जो जनवरी 2017 में आई थी, लागू की जानी चाहिए।

विभिन्न मंडलों व मुख्यालयों पर आयोजित धरने में देशभर के हजारों सीनियर सेक्शन इंजिनियर और जूनियर इंजिनियर शामिल रहे। उन्होंने यह भी कहा कि डीओपीटी के नियमों के मुताबिक केंद्रीय विभागों के समकक्ष रेलवे इंजिनियरों को भी ग्रुप-बी राजपत्रित का दर्जा मिलना चाहिए।

ए.आइ.आर. एफ के बैनर तले इंजीनियरों ने चेतावनी दी कि जब तक मंत्रालय उनकी मांगो को स्वीकार नहीं करेगा तब तक उनका संघर्ष चलता रहेगा।
रेल मंत्री को संबोधित ज्ञापन में 23 सूत्रीय मांग पत्र मंडल रेल प्रबंधकों व महाप्रबंधकों को सौंपा गया. रेल अभियन्ता अब निर्णायक लड़ाई लड़ने का मन बना चुके है, मांगे ना मानने पर आगामी आंदोलन उग्र होने पर प्रशासन की जिम्मेदारी होगी ।

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