बाजारवाद से बढ़ रहा प्रकृृृृति का शोषण और दोहन : कुलपति

बाजारवाद से बचकर मानवता के कल्याण के लिए जुटने का युवाओं से किया आह्वान , उत्तर प्रदेश दिवस पर बुविवि में व्याख्यान प्रतियोगिता आयोजित

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झांसी। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सुरेंद्र दुबे ने विद्यार्थियों का आह्वान किया कि वे पंडित दीन दयाल उपाध्याय के विचारों को आत्मसात कर अपनी जरूरतों को नियंत्रित करें। उन्होंने कहा कि सभी युवा बाजारवाद सें बचते हुए मानवता के कल्याण के लिए पूरे मनोयोग से जुटें, यही समय की मांग है। ऐसा करके ही पंडित दीनदयाल उपाध्याय के सपनों को साकार किया जा सकता है। प्रो. दुबे बुधवार को गांधी सभागार में पहले उत्तर प्रदेश दिवस पर विश्वविद्यालय की पंडित दीनदयाल उपाध्याय शोधपीठ के तत्वावधान में आयोजित व्याख्यान प्रतियोगिता में उपस्थित विद्यार्थियों, शिक्षकों और नगरवासियों को संबोधित कर रहे थे।
प्रो. दुबे ने कहा कि आज बाजारवाद तमाम जरूरतें पैदा कर दे रहा है। आज जरूरत इस बात की है कि युवा बाजारवाद के जाल से बचें। उन्होंने कहा कि आज तमाम समस्याएं प्रकृति के अत्यधिक दोहन और शोषण के कारण ही गहराती जा रही हैं। एक तरफ जहां ओजोन की परत में क्षरण हो रहा है, वहीं दूसरी ओर नदियां सूख रही हैं। ऋतुएं अपना स्वरूप बदल रही हैं। दिल्ली जैसे शहर स्मॉग की समस्या से जूझ रहे हैं। इन समस्याओं के कारणों पर गौर करें तो यह पाएंगे कि प्रकृति का अत्यधिक दोहन और शोषण ही इसके लिए जिम्मेदार है। भारतीय संस्कृति हमें प्रकृति से प्रेम करना सिखाती है। उसे अपनाकर हम समस्याओं से मुक्ति पा सकते हैं। प्रो. दुबे ने कहा कि पहले वामपंथी मित्र यह नारा देते थे कि कमाने वाला खाएगा। पंडित दीन दयाल उपाध्याय ने इससे भी अहम नारा दिया कि कमाने वाला ही खिलाएगा। पंडितजी ने वह नारा भारतीय संस्कृति की विशेषताओं को ध्यान में रखकर दिया था। कमाने वाला खाएगा नारे का परिणाम आज साफ नजर आता है। इस नारे पर भरोसा करने वाले अनेक लोग अपने वृद्ध माता.पिता को वृद्धाश्रमों में छोड़ आते हैं। वे यह भूल जाते हैं कि उनके माता.पिता ने पाल पोसकर ही उन्हें बड़ा किया और काम के लायक बनाया है। शिक्षण संस्थानों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इनकी साज सज्जा और उपकरणों में भी समाज का धन और श्रम लगा होता है। केवल विद्यार्थियों की ओर से जमा फीसों से ही ये संस्थाएं नहीं चल सकती हैं। आईआईटी और मेडिकल कालेजों में शिक्षा ग्रहण करने वाले अनेक विद्यार्थी भी इस बात को भूल जाते हैं कि उनके संस्थानों में भी समाज का पैसा लगा है। ऐसे में समाज के प्रति भी उनका कुछ उत्तरदायित्व बनता है।
पंडित दीन दयाल उपाध्याय के जीवन के विविध प्रसंगों का उल्लेख कर प्रो. दुबे ने विद्यार्थियों से उनसे प्रेरणा ग्रहण करने की अपील की। उन्होंने इस बात पर खुशी जताई कि प्रतियोगिता में शामिल होने के लिए विद्यार्थियों ने पंडित दीन दयाल उपाध्याय के बारे में जानकारी जुटाने का प्रयास किया। कुलपति प्रो. दुबे ने उत्तर प्रदेश दिवस के आयोजन में राज्यपाल राम नाईक की अहम भूमिका को भी रेखांकित किया।
मुख्य अतिथि और झांसी नगर के विधायक रवि शर्मा ने उत्तर प्रदेश दिवस के पहले आयोजन के लिए विवि के कुलपति प्रो.दुबे और शिक्षकों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में उत्तर प्रदेश दिवस पर लोगों को प्रदेश के सभी विभागों के विकास कार्यक्रमों की विधिवत जानकारी विस्तार से मिल सकेगी। लोग यह जान सकेंगे कि किस विभाग ने कितना विकास कार्य किया है। उन्होंने प्रदेश और केंद्र सरकार के द्वारा उठाये गये कदमों की तारीफ भी की। उन्होंने कहा कि दोनों सरकारें पंडित दीन दयाल उपाध्याय के सपनों को पूरा करने की दिशा में प्रयासरत हैं।
व्याख्यान प्रतियोगिता में कुल 12 विद्यार्थियों ने भाग लिया। इनमें अर्शदीप सिंह प्रथम, गरिमा त्रिवेदी द्वितीय और आकाश कुमार तिवारी तृतीय रहे। इन तीनों को अतिथियों ने क्रमशः डेढ़ हजार, एक हजार और पांच सौ रुपये का नगद पुरस्कार प्रदान किया।
कार्यक्रम की प्रारम्भ अतिथियों द्वारा मां सरस्वती और पंडित दीन दयाल उपाध्याय के चित्रों पर माल्यार्पण और दीप प्रज्ज्वलन के साथ की। इसके बाद राष्ट्रगीत वंदेमातरम गाया गया। शुरुआत में अतिथियों के स्वागत की रस्म पूरी की गई। तत्पश्चात पंडित दीन दयाल उपाध्याय शोधपीठ के समन्वयक प्रो.एमएल मौर्य ने पंडित दीन दयाल उपाध्याय के व्यक्तित्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कार्यक्रम की रूपरेखा भी प्रस्तुत की। उत्तर प्रदेश दिवस के महत्व को भी रेखांकित किया।
इसके बाद एनसीसी कैडेट रूपलता त्रिपाठी ने एक गीत…‘मैं भारत का संविधान हूं लाल किले से बोल रहा हूं’ पेश किया। हिंदी विभाग के शिक्षक डा. विनम्रसेन सिंह ने पंडित दीन दयाल उपाध्याय पर एक गीत प्रस्तुत किया। कला संकाय के अधिष्ठाता प्रो. सीबी सिंह ने भी पंडित दीन दयाल उपाध्याय के जीवन और दर्शन पर अपने विचार रखे।
इस कार्यक्रम में प्रो वीके सहगल, छात्र कल्याण अधिष्ठाता प्रो सुनील काबिया, वित्त अधिकारी धर्मपाल, सहायक कुलसचिव राकेश कुमार, विष्वविद्यालय एन.एस.एस. समन्वयक डा.एस.के.राय, संपत्ति अधिकारी डा. डीके भट्ट, प्रो.रोचना श्रीवास्तव, प्रो वीपी खरे, प्रो अपर्णा राज, प्रो एसके कटियार, प्रो. रोचना श्रीवास्तव, प्रो.प्रतीक अग्रवाल, डा. शंभूनाथ सिंह, डा. फुरकान मलिक, डा. संदीप अग्रवाल, डा.अमिताभ गौतम, डा. इकबाल खान, डा. मुहम्मद नईम, डा. नेहा मिश्रा, डा.ए.पी.एस.गौर, डा.संगीता लाल, डा.एस.सी.भट्ट, डा.बी.सी.जोशी, डा.वी.के.सिंह, डा.अभिमन्यु सिंह, डा. कौशल त्रिपाठी, डा. उमेश कुमार, डा. श्वेता पाण्डेय, सतीश साहनी, उमेश शुक्ल, जय सिंह, अभिषेक कुमार, राघवेंद्र दीक्षित, डा. शिल्पा मिश्रा आदि उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का संचालन डा0 इरा तिवारी एवं अंकिता जैस्मीन लाल ने किया। अंत में डा. अतुल गोयल ने सभी के प्रति आभार व्यक्त किया।

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