लोकतंत्र तभी सफल जब जनता और संसद दोनों जागरूक हो: प्रो वैशम्पायन

बुविवि में आयोजित युवा संसद में विद्यार्थियों ने दिखाई अपनी प्रतिभा

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झांसी। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो.जे.वी.वैशंपायन ने कहा कि लोकतंत्र तभी सफल हो सकता है जब देश की जनता और संसद दोनों जागरूक हों। युवाओं को अपनी संसदीय परंपराओं का ज्ञान होना अत्यंत आवश्यक है। इन्हीं युवाओं में से कुछ भविष्य में देश की विभिन्न विधायी संस्थाओं का प्रतिनिधित्व करेंगे। प्रो. वैशंपायन बृहस्पतिवार को भारत सरकार के युवा एवं खेल मालय के तत्वाण्धान में आयेाजित बुंदेलखंड विश्वविद्यालय की राष्ट्रीय सेवा येाजना के तत्वाधान में आयेाजित में आयोजित राष्ट्रीय युवा संसद महोत्सव 2019 में जुटे युवाओं और शिक्षकों को संबोधित कर रहे थे। वे इस कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि उपस्थित थे।
प्रो. वैशम्पायन ने चिंताभरे लहजे में कहा कि जन जागरूकता की कमी की वजह से ही देश की संसद ठीक से काम नहीं कर रही है। अक्सर संसद की कार्यवाहियां नियमानुसार नहीं चलती है या अधिकांश सत्रों में सांसदों के शोर शराबे के कारण लेाक महत्व के मुछ्दो पर बहस नही हो पाती है। संसद में जब बहस हो भी रही होती है तो अधिकांश सदस्य सही मुद्दों और सवालों को वहां नहीं उठाते हैं। यह भी देखा गया है कि अधिकांश सदस्य मुद्दे से इतर ही बोलते हैं। यह माना जाता है कि विचार विमर्श से ही सही बिंदु उभरकर सामने आते हैं लेकिन वैसा ठीक से हो नहीं पाता है। संसद की उपयोगिता तभी सार्थक सिद्ध होगी जब वहां पर देश की बहुतायत जनसंख्या से संबंधित मुद्दों पर बहस और समुचित परिचर्चा के बाद उचित कानून बनें। कुलपति ने कहा कि लोकतंत्र में सभी युवाओं की भागीदारी होनी चाहिए। इसी तथ्य को ध्यान में रखकर इस कार्यक्रम को निर्धारित किया गया है। उन्होंने उम्मीद जताई कि आगे युवा संसद में उपस्थित युवा बहस और परिचर्चा के स्तर को ऊंचा उठाएंगे तभी देश की संसद की उपयोगिता परिलक्षित होगी।
इससे पहले राष्ट्रीय सेवा योजना के समन्वयक डा. मुन्ना तिवारी ने युवा संसद के आयोजन और प्रस्तावित कार्यक्रमों के बारे में जानकारी दी। छात्र कल्याण अधिष्ठाता प्रो. देवेश निगम ने उम्मीद जताई कि युवा संसद कार्यक्रम से युवाओं को देश की संसद की कार्य पद्धति को व्यावहारिक रूप में समझने का मौका मिलेगा। इससे आगे देश को जागरूक जन प्रतिनिधि मिलने की संभावनाएं भी बलवती होंगी। इस कार्यक्रम की शुरुआत में विद्यार्थियों ने एनएसएस का लक्ष्य गीत प्रस्तुत किया। इस कार्यक्रम का संचालन एनएसएस की पांचवी इकाई के कार्यक्रम अधिकारी डा. मुहम्मद नईम ने किया। इस कार्यक्रम में समाजसेवी शशिप्रभा मिश्रा, ममता जैन, डा. जितेंद्र कुमार, डा. उमेश कुमार आदि बतौर निर्णायक उपस्थित रहे। इस कार्यक्रम में डा. प्रशांत मिश्र, सतीश साहनी, उमेश शुक्ल समेत अनेक शिक्षक शिक्षिकाएं उपस्थित रहे।
उद्घाटन सत्र के पश्चातयुवा संसद युवाओं ने सत्ता पक्ष और विपक्ष के विभिन्न किरादारों के रूप में अपनी भाषण शैली का परिचय दिया। इस संसद में संबोधन सत्र, प्रश्न काल, नए सदस्य के शपथ ग्रहण, किसी सदस्य के निधन पर शोक संवेदना व्यक्त करने के तौर तरीकों का प्रदर्शन किया। संसद की विधायी कार्यवाही कैसे चलती है और लोकसभा अध्यक्ष की भूमिका क्या होती है इस बारे में भी जानकारी दी गई। ग्लोबल वार्मिंग, किसानों की दिक्कतों को भी दर्शाया गया। भ्रष्टाचार के मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच होने वाली तीखी बहस को भी दर्शाया गया। यह दर्शाया गया कि कैसे सत्ता पक्ष के सदस्य अपनी सरकार की उपलब्धियों का ब्योरा सदन में रखते हैं। बीच बीच में विपक्षी दल के सदस्य कैसे अर्नगल टिप्पणी करते हैं और कैसे उन्हें लोकसभा के अध्यक्ष नियंत्रित करते हैं।

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