मैैं अपनी झांंसी नहीं दूंगी

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झाँसी| भारत के उत्तर प्रदेश प्रान्त में स्थित एक प्रमुख शहर है। यह उत्तर प्रदेश एवं मध्य प्रदेश की सीमा पर स्थित है। यह बुंदेलखंड क्षेत्र में आता है। झॉसी शहर एक प्रमुख रेल एवं सड़क केन्द्र है। यह शहर झांसी जिले एवं झांसी मंडल का प्रशासनिक केन्द्र भी है। झॉसी शहर पत्थर निर्मित किले के चारों तरफ़ फ़ैला हुआ है, यह किला शहर के मध्य स्थित एक पहाड़ी पर निर्मित है।
उत्तर प्रदेश में 20.7 वर्ग कि मी. के क्षेत्र में फैला झांसी पर प्रारंभ में चन्देल राजाओं का नियंत्रण था। उस समय इसे बलवंत नगर के नाम से जाना जाता है। झांसी का महत्व सत्रहवीं शताब्दी में ओरछा के राजा बीर सिंह देव के शासनकाल में बढ़ा। इस दौरान राजा बीर सिंह और उनके उत्तराधिकारियों ने झांसी में अनेक ऐतिहासिक इमारतों का निर्माण करवाया।
” बुन्देलों हरबोलों के मुख हमने सुनी कहानी थी खूब लड़ी मर्दानी वो तो झांसी वाली रानी थी”
सुभद्राकुमारी चौहान की ये पंक्तियों बुन्देलखंड का गढ़ माने वाले झांसी के संघर्षशील इतिहास को सटीक परिभाषित करती हैं। 1857 में झांसी की रानी लक्ष्मीबाई ने अंग्रेजों की अधीनता स्वीकार करने के स्थान पर उनके विरूद्ध संघर्ष करना उचित लगा। वे अंग्रेजों से वीरतापूर्वक लड़ी और अन्त में वीरगति को प्राप्त हुईं। झांसी नगर के घर-घर में रानी लक्ष्मीबाई की वीरता के किस्से सुनाए जाते हैं।
इतिहास-
९ वी शताब्दी मै, झॉसी का राज्य खजुराहो के राजपूत चन्देल वंश के राजाओं के अन्तर्गत आया। कृत्रिम जलाशय एवं पहाडी क्षेत्र के वास्तुशिल्पिय खन्डहर शायद इसी काल के है। चन्देल वंश के बाद उन्के सेवक खन्गार ने इस क्षेत्र का कार्यभार्र सम्भाला । समीप स्थित “करार” का किला इसी वन्श के राजाओं ने बनवाया था ।
१४ वी शताब्दि के निकट् बुन्देला विन्ध्याच्ल् छेत्र् से नीचे मैदानी छेत्र् मे आना प्रारम्भ् किया और धीरे – धीरे सारे मैदानी छेत्र् मै फ़ैल गये जिसे आज् बुन्देलखन्ड के नाम् से जाना जाता है। झॉसीकिले का निर्माण ओर्छा के राजा बीर सिह देव द्वारा कर्वाया गया था । किव्दन्ति है कि ओर्छा के राजा बीर सिह देव नेदूर् से पहाड़ि पर छाया देखी जिसे बुन्देली भाषा मे “झॉई सी” बोला गया, इसी शब्द् के अप्भ्रन्श् से शहर् का नाम् पडा ।
१७ वी शताब्दि मै मुगल् कालीन् साम्राज्य के राजाऔ के बुन्देला छेत्र् मे लगातार् आक्र्मण् के कारण् बुन्देला राजा छ्त्रसाल् ने सन् १७३२ मे [[मराठा] साम्राज्य से मदद् मान्गी । मराठा मदद् के लिये आगे आये । सन् १७३४ मे राजा छ्त्रसाल् की म्रत्यु के बाद बुन्देला छेत्र् का एक तिहायी हिस्सा मराठो को दे दिया गया । मराठो ने शहर् का विकास् किया और इस्के लिये ओरछा से लोगो को ला कर् बसाया गया ।
सन् १८०६ मे, मराठा शक्ति कमजोर् पड्ने के बाद ब्रितानी राज और मराठा के बीच् समझोता हुआ जिसमे मराठो ने ब्रितानी साम्राज्य का प्रभुत्व स्वीकार् कर् लिया । सन् १८१७ मे मराठो ने पूने मे बुन्देल्खन्ड् छेत्र् के सारे अधिकार् ब्रितानी ईस्ट् ईडिया कम्पनी को दे दिये । सन् १८५७ मे झॉसी के राजा गन्गाधर् राव् की म्रत्यु हो गयी। तत्कालीन् गवेर्नल जनरल् ने झॉसी को पूरी तरह् से अपने अधिकार मे ले लिया । राजा गन्गाधर राव कि विधवा रानी लक्ष्मीबाई ने इसका विरोध किया और कहा कि राजा गन्गाधर राव् के दत्तक पुत्र को राज्य का उत्राधिकारी माना जाये, परन्तु ब्रितानी राज् ने मानने से इन्कार कर दिया । ईन्ही परिस्थितियों के चलते झॉसी मे सन् १८५७ का संग्राम हुआ। जो कि भारतीय स्वतन्त्र्ता संग्राम के लिये नीव् का पत्थर साबित् हुआ। जून् १८५७ मे १२वी पैदल् सेना के सैनिको ने झॉसी के किले पर कब्ज़ा कर लिया और किले मे मौजूद ब्रितानी अफ़सरो को मार दिया गया । ब्रितानी राज् से लडायी के दोरान् रानी लक्ष्मीबाईने स्वयम् सेना का सन्चालान् किया। नवम्बर १८५८ मे झॉसी को फ़िर से ब्रितानी राज् मे मिला लिया गया और झॉसी के अधिकार ग्वालियर के राजा को दे दिये गये। सन् १८८६ मे झॉसी को यूनाइटिड प्रोविन्स मे जोडा गया जो स्वतन्त्र्ता प्राप्ति के बाद १९५६मै उत्तर प्रदेश बना।
शिक्षा-
झॉसी शहर बुन्देलखन्ड् क्षेत्र मे अध्यन् का एक प्रमुख् केन्द्र है। विध्यालय् एवं अध्यन् केन्द्र सरकार तथा निजी क्षेत्र द्वारा चलाये जाते है। बुन्देलखन्ड् विश्वविध्यालय जिसकी स्थापना सन् १९७५ मे की गयी थी, विज्ञान,कला एवं व्यवसायिक् शिक्षा की उपाधि देता है। झॉसी शहर और आसपास् के अधिकतर विध्यालय बुन्देलखन्ड् विश्वविध्यालय से सम्बद्ध् है। बुन्देलखन्ड् अभियान्त्रिकी एवं तकनिकी सन्स्थान् उत्तर प्रदेश् सरकार द्वारा स्थापित् तकनिकी सन्स्थान् है जो उत्तर प्रदेश् तकनिकी विश्वविध्यालय से सम्बद्ध् है। रानी लक्ष्मीबाईचिकित्सा सन्स्थान् चिकित्सा विज्ञान मे उपाधि प्रदान् करता है। झॉसी मे आयुर्वेदिक अध्यन् सन्स्थान् भी है जो कि प्राचीन् भारतीय चिकित्सा विज्ञान “आयुर्वेद” की शिक्षा देता है। उच्च शिक्षा के अलावा झॉसी मे अनेक प्राथमिक विध्यालय भी है। ये विध्यालय सरकार तथा निजी क्षेत्र द्वारा चलाये जाते है। विध्यालयो मे शिक्षा का माध्यम हिन्दी एवं अन्ग्रेज़ी भाषा है। विध्यालय उत्तर प्रदेश् माध्यमिक शिक्षा परिषद, केन्द्रिय माध्यमिक शिक्षा परिषद एवं से सम्बद्ध है। झॉसी का पुरुष् साक्षरता अनुपात ८०% महिला साक्षरता अनुपात ५१% है, तथा कुल् साक्षरता अनुपात ६६% है।

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