कच्‍ची शराब – गांव सेे शहर तक गंदा है पर धंधा है ये

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झाँसी। जहरीली शराब से चार जिलों में लगभग पौने दो सौ लोगों की मौत ने पूरे प्रदेश की राजनीति में तूफान खड़ा कर दिया हैं। प्रशासनिक और पुलिस अफसर कच्ची शराब को लेकर एक बार फिर निशाने पर आ गए हैं। डीजीपी के आदेश पर आनन-फानन में सभी जनपदों में कच्ची शराब बनाने वालों की धरपकड़ को अभियान चलाया जा रहा है। झाँसी जनपद में अभियान चलाते हुए कई लोगों को गिरफ्तार कर हजारों लीटर शराब बरामद की है। ग्रामीण इलाकों में कच्ची शराब की बिक्री जोरों पर है। उन्नाव गेट स्थित रेलवे क्रासिंग के पास, टपरियन, सीपरी थाना क्षेत्र में कई स्‍थानों पर तो प्रेमनगर थाना क्षेत्र में पहूज नदी के किनारे, मरघटे के पास आदि स्‍थानों पर दिनभर पियक्कड़ों का जमघट लगा रहता है। कमोबेश यही स्थिति बाकी कई मुहल्लों की है। लोग आए दिन शिकायतें करते रहते हैं, पर पुलिस तभी जागती हैं, जब कोई बड़ा हादसा हो जाता है। पुलिस ने चिह्नित किया है कि झाँसी में 40 स्थानों पर बड़े पैमाने पर कच्ची शराब का निर्माण किया जाता है। शराब बेचने की जिम्‍मेदारी ज्यादातर महिलाएं निभा रही है।

मौत के करीब ले जाता है हर घूंट

कच्ची शराब को अधिक नशीली बनाने के चक्कर में ये जहरीली हो जाती है। सामान्यता इसे बनाने में गुड़, शीरा से लहन तैयार किया जाता है। लहन को मिट्टी में गाड़ दिया जाता है। इसमें यूरिया और बेशर्म बेल की पत्तिया डाली जाती हैं। अधिक नशीली बनाने के लिए इसमें ऑक्सीटोसिन मिला दिया जाता है, जो मौत का कारण बनता है। पुलिस के मुताबिक, कच्ची शराब में यूरिया और ऑक्सिटोसिन जैसे केमिकल मिलाने की वजह से मिथाइल एल्कोहल बन जाता है। इससे शरीर के अंदरूनी अंग काम करना बंद कर देते हैं। इसकी वजह से कई बार तुरंत मौत हो जाती है, जबकि कुछ लोगों में यह प्रक्रिया धीरे-धीरे होती है।

शरीर में आक्सीजन पड़ी खामोश

मेडिकल कालेज के इमरजेंसी मेडिकल अफसर का कहना है कि शराब में इथाइल अल्कोहल होता है, जो जानलेवा नहीं है। कई बार इसमें मेथेनॉल मिलाने से यह जहर बन जाता है। 15 एमएल से ज्यादा मेथेनॉल शरीर में पहुंचते ही केमिकल रिएक्शन शुरू कर देता है। यह फार्मेल्डिहाइड में बदलने के साथ ही तेजी से फार्मिक एसिड बनाने लगता है। इससे शरीर का मेटाबोलिज्म टूट जाता है। सबसे पहले एल्कोहलिक रेटिनोपैथी से आंख की रोशनी जाती है। रक्त में अ ल घुलने से ब्रेन, किडनी, हार्ट एवं लंग्स सभी खराब होने लगते हैं। हाइपोक्सिया-‘खून में आक्सीजन खत्म होने से मरीजों का ब्लडप्रेशर बैठ गया।

औपचारिक होती है कार्रवाई

कच्ची शराब का निर्माण और बिक्री करने वालों के खिलाफ आए दिन कार्रवाई होती है। आबकारी विभाग के अभिलेख इससे रंगे मिलेंगे। उन्हें पकड़ा जाता है और वे छूट जाते हैं। इसके अगले ही दिन वे दुबारा काम पर लौट जाते हैं। इसकी वजह उन पर होने वाली कार्रवाई का औपचारिक होना है। दरअसल, कच्ची शराब समेत पकड़े जाने वाले ज्यादातर लोगों के खिलाफ आबकारी अधिनियम की धारा 60 के तहत कार्रवाई होती है, जिसमें थाने से मुचलका भरकर छूटने का प्रावधान है। जबकि, शराब में खतरनाक अपमिश्रण पाए जाने पर आईपीसी की धारा 272 का भी इस्तेमाल किया जा सकता है, जिसमें आजीवन कारावास तक का प्रावधान है। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ ओपी सिंह ने जिले भर के थानेदारों/ प्रभारी निरीक्षकों को आदेश दिया हैं, आबकारी और प्रशासनिक टीम के साथ कच्ची शराब को लेकर छापामारी करें। पंद्रह दिन का लगातार अभियान चलाया है। पहले दिन पुलिस को कामयाबी भी मिली है। पंद्रह दिनों में कच्ची शराब को पूरी तरह से बंद करा दिया जाएगा।

यहां यहां पर हुई कार्रवाई

आबकारी और पुलिस विभाग ने संयुक्त रुप से कच्ची शराब के अड्डों पर दबिश दी। एसएसपी के निर्देश पर बरुआसागर थाना प्रभारी निरीक्षक धर्मेन्द्र सिंह चौहान, आबकारी निरीक्षक अमित कुमार ने टीम के साथ लक्ष्मणपुरा डेरा पर छापा मारा। यहां पर 20 हजार लहन नष्ट किया। जबकि दर्जनों शराब से भरे ड्रम बरामद किए हैं। इसके अलावा लहचूरा थाना प्रभारी प्रवीण कुमार यादव ने कबूतरा डेरा पर दबिश दी। वहां पर 15 हजार लीटर लहन नष्ट किया गया। मौके से तीन अभियुक्तों को गिर तार कर 850 लीटर शराब बरामद की है। इसके अलावा टहरौली थाना क्षेत्र के अशोक नगर, सिद्धार्थ नगर आदि स्थानों पर छापेमार की कार्रवाई की है। टहरौली से तीन अभियुक्तों के पास से 120 लीटर, सकरार पुलिस ने लक्ष्मण अहिरवार से बीस लीटर, कटेरा पुलिस ने श्रीमती हेमा को गिरफ्तार कर 20 लीटर कच्ची शराब बरामद की। उधर, उप आबकारी आयुक्त एस के राय के निर्देश पर आबकारी निरीक्षक (एसएसएफ) ने अपनी टीम के साथ बरुआसागर पुलिस के सहयोग से लक्ष्मणपुरा डेरा पर छापा मारा। वहां पर हजारों लीटर लहन नष्ट कर 25 लीटर शराब बरामद की है।

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