जन्नत की कुंजी है मेरी मुट्ठी में, अपनी मां के पांव दबाता रहता हूं

69वें गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर काव्योत्सव 2018 का गवाह बना गांधी सभागार

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झांसी। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय का गांधी सभागार गुरुवार को 69वें गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर आयोजित काव्योत्सव 2018 का गवाह बना। इसमें देश के चोटी के शायरों और रचनाकारों ने अपनी शेरो-शायरी और प्रतिनिधि रचनाओं से युवाओं का दिल जीत लिया। युवा विद्यार्थियों और शिक्षकों ने तालियों की गड़गड़ाहट से पूरे हाल और आसपास के माहौल को गुंजा दिया।
प्रख्यात शायर डा. नवाज देवबंदी ने ‘जब मैंने उसे खास निगाहे नाज से देखा, आईना फिर उसने नए अंदाज से देखा’ सुनाकर युवाओं को अपने मोहपाश में जकड़ सा लिया। फिर उन्होंने ‘महफिल में जिसे गौर से सब देख रहे थे, देखा न उसे मैंने तो उसने मुझे गौर से देखा’ शेर पढ़कर अपना कारवां आगे बढ़ाया। उनकी एक और रचना कहानी भी हकीकत हो गई है क्या, मेरे उपर इनायत हो गई है क्या, शिकायत पर शिकायत कर रहे हो, तुम्हें मुझसे मोहब्बत हो गई है क्या’ से युवाओं को अपना मुरीद बना लिया। फिर उन्होंने ‘‘जिन पर लुटा चुका हूं दुनिया की दौलतें, उन वारिसों ने मुझको कफन नाप कर दिया’ शेर सुनाया। इसके बाद उन्होंने ‘‘बाप और बेटा पहले आएं तो फिर पोता आता है, आने की तरतीब है लेकिन जाने की तरतीब नहीं’ रचना सुनाई। उनकी एक गजल ‘‘कातिल की बस्ती में रहना अच्छा लगता है, और फिर उसको कातिल कहना अच्छा लगता है’ पेश कर लोगों की वाहवाही बटोरी। उन्होंने अपनी रचनाओं ‘‘उसकी एड़ी पर्वत चोटी लगती है, मां के पांव से जन्नत छोटी लगती है और तन्हाई का जश्न मनाता रहता हूं, खुद को अपने शेर सुनाता रहता हूं, जन्नत की कुंजी है मेरी मुट््ठी में, अपनी मां के पांव दबाता रहता हूं’, वो भाषण से आग लगाते रहते हैं, मैं गजलों से आग बुझाता रहता हूं, से भी लोगों का दिल जीता। उन्होंने एक नई गजल बेख्याली में ख्याल उसका, मेरा क्या है ये कमाल उसका, ये जो मेरा हाल पूछते हैं, पूछना चाहते हैं हाल उसका’ सुनाकर लोगों को वाहवाह करने को मजबूर कर दिया। उनके एक अन्य शेर ‘‘एक आंखों के पास है, एक आंखों से दूर, बेटा हीरा होता है और बेटी कोहिनूर’ को भी खूब सराहा गया।
अपर आयुक्त न्यायिक और शायर डा. अख्तर रियाज ने एक गजल ‘‘ये कैसे मोड़ पर आकर हयात ठहरी है, अभी तो हां पर नहीं पर बात ठहरी है‘ और एक नज्म जब जब शब में निकला चांद, देख उन्हें शरमाया चांद से श्रोताओं की तालियां बटोरीं। काव्योत्सव का संचालन कर रहे मुईन शादाब ने ‘‘शिकस्त जिसका नसीब होगी कुछ उसका सोचो तुम्हारा क्या है तुम्हें तो बस सिक्का उछालना है‘‘ पंक्तियां सुनाकर लोगों की वाहवाही बटोरी। उन्होंने ‘‘ सदियों में बस दो चार ही रहबर होते हैं, बाकी सब स्पीड ब्रेकर होते हैं’ और ‘‘मुद््दतों उसने हमें पहले तराजू में रखा, तब जाकर कहीं अपने बाजू में रखा’ सुनाकर अपने दिल के भाव व्यक्त किए। सरफराज मासूम ने ‘‘उसूलों की तिजारत हो रही है, सियासत में सियासत हो रही है, परिंदों को न मारे आप पत्थर, दरख्तों की इबादत हो रही है’ रचना पढ़ी। कवि अर्जुन सिंह चांद ने जबसे अधरों की तू ही हंसी हो गई, प्रीत की फूल की पांखुरी हो गई आदि रचनाओं से श्रोताओं की तालियां बटोरीं। कानपुर से आई चांदनी पाण्डेय ने किसे तलाश करुंगी किसे बुलाउंगी, खुद ही जंग करुंगी तो जीत जाउंगी और जले चिराग बुझाने की कोशिश नहीं करते, अब आ गए हो तो जाने की जिद नहीं करते रचनाओं से अपना रंग बिख्ेरा। मदन मोहन मिश्रा दानिश ने तुम अपने पर अहसान क्यों नहीं करते, किया है इश्क तो ऐलान क्यों नहीं करते, बस इक चिराग के बुझने से बुझ गए खुद भी, तुम आंधियों को परेशान क्यों नहीं करते रचना पेश कर लोगों से वाहवाही हासिल की। मदन मोहन बिरथरे मार्तंड ने निर्बल को दे सहारा आओ खड़ा करें हम रचना सुनाई। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के कुलपति साहित्य भूषण प्रो. सुरेंद्र दुबे ने काव्योत्सव में आए कवियों की रचनाओं की तारीफ करते हुए कहा कि कविता मोहब्बत का पैगाम है। कविता से क्रांति होती है। कविता से निर्माण भी होता है। रचनाकार विधाता की भूमिका में होता है। कविता एक कला है। आज के काव्योत्सव से विद्यार्थियों को बहुत कुछ मिला है। उन्होंने काव्योत्सव के संयोजक डा. इकबाल खान और उनके सहयोगियों की सराहना की। बाद में उन्होंने सभी शायरों एवं रचनाकारों का समृति चिह्न भेंटकर सम्मानित किया। काव्योत्सव की शुरुआत मुख्य अतिथि और अपर आयुक्त न्यायिक डा. अख्तर रियाज और कुलपति प्रो. दुबे और काव्योत्सव में उपस्थित शायरों और रचनाकारों ने शमां रोशन कर की। इसके बाद सभी अतिथियों के स्वागत की रस्म अदा की गई। इस मौके पर छात्र कल्याण अधिष्ठाता प्रो सुनील काबिया, कुलानुशासक प्रो. एमएल मौर्य, प्रो. वीके सहगल, डा. डीके भट्ट, प्रो. देवेश निगम, डा. रेखा लगरखा, डा. मुहम्मद नईम, डा. सौरभ श्रीवास्तव, उमेश शुक्ल, डा. संतोष पाण्डेय, इंजी. राहुल शुक्ल, अभिष्ेक कुमार, जय सिंह, आर्कि. प्रदीप यादव, विनय नरुला, दिनेश कुमार प्रजापति आदि उपस्थित रहे।

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