एक दारोगा के निशाने पर तीन अपराधी: डीआईजी – रिपोर्ट गौरव कुशवाहा

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झाँसी। पिछले पांच सालों में संगीन वारदातों में संलिप्त रहे जिले के लगभग 300 अपराधियों की जांच पड़ताल के लिए क्रिमनल ट्रेसिंग ऑपरेशन लॉंच किया गया है। पुलिस उपमहानिरीक्षक जवाहर के निर्देश पर तीनों जिलों में टीम बनाकर इसकी जिम्मेदारी सौंपी है। ऑपरेशन के तहत एक-एक दारोगा पर औसतन तीन-तीन अपराधियों की खोज खबर जुटाने का जिम्मा होगा। इससे क्षेत्र में हो रहे अपराधों में पुराने संगीन मामलों में संलिप्त अपराधियों के कनेक्शन का खुलासा हो सकेगा।
अभी तक पुलिस के टॉरगेट पर बड़ी वारदातों में वांछित चल रहे अपराधी रहते थे, लेकिन अब पुलिस ने पिछले पांच सालों में बड़ी घटनाओं में शामिल अपराधियों की कुंडली खंगालने की कवायद शुरू की है। पुलिस उपमहानिरीक्षक के निर्देश पर परिक्षेत्र में ऐसे करीब 300 अपराधियों की सूची तैयार की गई है, जो पिछले पांच सालों में हत्या, लूट, डकैती व चोरी समेत गंभीर आपराधिक घटनाओं में शामिल रहे हैं। इनमें से कुछ अपराधी सजा काटने के बाद रिहा हो चुके हैं, लेकिन जेल से बाहर आने के बाद कहीं इन आरोपियों ने फिर से कोई गैंग या आपराधिक नेटवर्क तो खड़ा नहीं कर लिया गया है। इसकी पड़ताल में ऑपरेशन क्रिमनल खासा मददगार साबित हो सकता है। एसपी सिटी देवेश कुमार ने बताया कि ऑपरेशन शुरू कर दिया गया है। इसके लिए सभी कोतवाली और थानों में दारोगाओं एवं पुलिसकर्मियों की टीमों का गठन कर दिया गया है। जिसमें प्रत्येक टीम को संगीन मामलों में अपराधी रहे तीन लोगों की जांच पड़ताल का जिम्मा सौंपा गया है। प्रत्येक 15 दिन में प्रगति की समीक्षा की जाएगी। इसके लिए सभी थानों को दिशा निर्देश जारी कर दिए गए हैं।

सजायाफ्ता अपराधी देते रहे हैं पुलिस को चुनौती
संगीन अपराधों में जेल से सजा काटने के बाद भी ये लोग पुलिस के लिए चुनौती बनते रहे हैं, हालांकि कुछ मामलों में इस तरह के आरोपी सामान्य जीवन में खुद को ढाल लेते हैं, लेकिन ज्यादातर मामलों में इस तरह के आरोपियों के फिर से जुर्म की दुनिया में कदम रखने का खतरा बना रहता है। सिविल लाइंस कोतवाली में हुए कई खुलासों में यह बात देखने को मिली है। हाल ही में बाइक चोर गिरोह और शोरूम व्यापारी से हुई लूट के मामले में कई ऐसे आरोपियों के नाम सामने आए थे, जो पूर्व में सजा काट चुके थे। इसके अलावा भी समय-समय पर जेल से रिहा होने वाले आरोपियों के वारदातों को अंजाम देने का खुलासा किया जाता रहा है। ऐसे में यह ऑपरेशन अपराध नियंत्रण पर अंकुश लगाने में कामयाब हो सकता है।

क्राइम इनफॉरमेशन यूनिट की भी होगी भूमिका
इस ऑपरेशन में क्राइम इनफॉरमेशन यूनिट (सीआईयू) गठित टीमों को सजायाफ्ता लोगों को ट्रेस करने में मदद करेगी। गौरतलब है कि यह यूनिट पुलिस को आईटी तकनीक के जरिए मोबाइल आदि की लोकेशन से अपराधियों तक पहुंचने में मदद देती है। ऐसे में इस ऑपरेशन को कामयाब बनाने में इस यूनिट की भी बड़ी भूमिका होगी।

हत्या, लूट, डकैती और रोड होल्डअप के आरोपियों पर फोकस
ऑपरेशन में हत्या, लूट, डकैती और रोड होल्डअप जैसी बड़ी घटनाओं पर फोकस होगा। इस तरह की बड़ी घटनाओं में शामिल रहे आरोपियों को ट्रेस करने का जिम्मा दारोगाओं को सौंपा गया है, जबकि अवैध शराब समेत अन्य मादक पदार्थों की तस्करी, चोरी और नकबजनी आदि की घटनाओं की जांच के लिए कांस्टेबलों को जिम्मेदारी सौंपी गई है।

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जनवरी में बढ़े महिलाओं पर अपराध, घटनास्थल की होगी जीपीएस मैपिंग

झाँसी। जिले में बढ़ते महिला अपराध को नियंत्रित करने के लिए पुलिस के सारे प्रयास विफल साबित हो रहे। एक गोपनीय रिपोर्ट से पता चला है कि जनवरी, 2017 की तुलना में जनवरी, 2018 में 14 प्रतिशत अपराध बढ़े हैं। इसके अलावा अन्य धाराओं के अपराध भी 11 प्रतिशत बढ़ गए। अब इसे ही साल की सबसे बड़ी चुनौती मानकर पुलिस घटना का समय और घटनास्थल को जीपीएस मैप पर चिह्नित कर प्लान बना रही है। महिलाओं के साथ अपहरण, छेड़छाड़ और ज्यादती की घटनाएं भी बढ़ गईं। इसे देखते हुए परिक्षेत्र में महिलाओं के विरुद्ध होने वाले अपराधों को लेकर अलग-अलग प्रयास किए जा रहे हैं।

अपराध बढ़ने का एक कारण यह भी
पड़ताल में खुलासा हुआ कि अपराधों की संख्या में बढ़ोत्तरी होने का एक कारण दिसंबर में कई रिपोर्ट नहीं होना भी रहा। अपराध कम करने के उद्देश्य से कई थानों ने 15 दिसंबर के बाद अपराध दर्ज करना ही बंद कर दिए थे। इसका असर जनवरी में देखने को मिला। जहां हो रही घटनाएं, वहां फोकस ही नहीं छेड़छाड़ की घटनाओं का एक ट्रेंड है, जिसे पुलिस समझने में नाकाम रही। स्कूल, कॉलेज के अलावा बस स्टॉप के पास के कुछ चिह्नित इलाके हैं, जहां लगातार छेड़छाड़ की घटनाएं हुई हैं। थाना स्तर पर उन्हें रोकने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए।

इलाके चिह्नित करने के साथ समय भी तय करेंगे
एसपी सिटी देवेश कुमार पांडेय ने बताया कि महिला अपराध के साथ ही वाहन चोरी की बढ़ती घटनाएं भी चिह्नित हुई हैं। हमने सभी थानों को निर्देश दिए हैं कि घटनास्थल, घटना का समय देखा जाए। इसके बाद वाहन चेकिंग और गश्त कराई जाए। पुराने अपराधियों के साथ वाहन चोरों की निगरानी की जाए। चोरी की गाड़ियां खरीदने वालों पर भी कार्रवाई हो।

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