यह महानगर में किसी गृहयुद्ध की चेतावनी ताेे नहीं : गाैरव कुशवाहा की विशेष रिपोर्ट

अवैध तमंचे और पिस्टल की मंडी बन रहा महानगर

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झाँसी। ‘ महानगर में अवैध तमंचों, पिस्टलों और रिवॉल्वर की सबसे ज्यादा डिमांड है। ये हथियार मध्य प्रदेश, गुजरात व राजस्थान राज्यों से तस्करी कर यहां लाए जाते हैं। तस्करों के तार विदेशों से जुड़े हुए हैं।’ इंटेलिजेंस की इस रिपोर्ट से जहां पुलिस का माथा ठनक रहा है, वहीं ताबड़तोड़ हथियार बरामदगी इस आशंका को और पुख्ता कर रही है। पुलिस के अनुसार, पिछले 1 साल में जिले में 350 अवैध हथियार बरामद हुए हैं। कई इलाकों में चल रहीं हथियार फैक्ट्री भी पकड़ी गईं।

हथियारों की तस्करी का सच

जिले में पिछले 20 वर्षों के दौरान जमीन अधिग्रहण और डिवेलपमेंट के काम तेज हुए हैं। इसके चलते क्राइम का ग्राफ भी बढ़ा है। पुलिस के जानकार भी इसे मानते हैं। वे कहते हैं, अवैध हथियार से पकड़े जाने का खतरा कम होता है। लोग यूज एंड थ्रो पर ज्यादा विश्वास करने लगे हैं।

अवैध हथियार में वृद्धि की वजह

अपराधियों के अलावा अपराध से दूर रहने वाले लोग भी अपनी हिफाजत के लिए अवैध हथियार रखते हैं। वजह, लाइसेंस न बनना। प्रशासन के पास फिलहाल 23 हजार से ज्यादा हथियार लाइसेंस पेंडिंग हैं। डीएम ने 50 पर्सेंट एप्लिकेशनों को री-चेकिंग के लिए पुलिस के पास भेज दिया है। कुछ मामले 6 महीने से ज्यादा पुराने होने के कारण पुलिस के पास लौट गए हैं। सूत्रों के अनुसार, हथियार लाइसेंस सिर्फ ‘पहुंच’ वालों के ही बनते हैं।

कहां से आता है ‘सामान’

पुलिस फाइल के अनुसार, खंंडवा, इटारसी, भरतपुर और बांदा से अवैध हथियार आते हैं। जबकि अन्य राज्यों से भी बड़े पैमाने पर हथियार खरीद होती है। ऑटोमैटिक पिस्टल और अन्य घातक हथियार नेपाल और अफगानिस्तान के स्मगलिंग के जरिए मंगाए जाते हैं। यहां से एके-47 जैसे घातक हथियार भी आसानी से मिल जाती है। जिले में मोंठ, मऊरानीपुर और गरौठा क्षेत्र में तो बाकायदा हथियार बनाने की फैक्ट्रियां चलने की सूचनाएं भी मिलती रहती हैं।

‘500 में तमंचा, 3,000 में पिस्टल’

अवैध हथियारों के साथ पकड़े गए तस्कर ने कबूला था कि मध्य प्रदेश के रूरल एरिया में 500 रुपये में तमंचा और 2-3 हजार रुपये में पिस्टल-रिवॉल्वर मिल जाती है। पिस्टल देखने में असली लगती है। इस पर फर्जी नंबर और स्‍थान भी लिखा होता है।

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