टैक्स वसूली पर जोर बढ़ाएगा आईटी डिपार्टमेंट

- बड़े कारोबारियों और ज्वैलर्स पर सीधी नजर

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झाँसी। अगले तीन महीनों में इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की सक्रियता काफी बढ़ सकती है। सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्सेज ने सभी सीनियर टैक्स अधिकारियों को आगाह किया है कि उनके कामकाज पर ‘शीर्ष स्तर से नजर रखी जा रही है।’ ऐसे में डिपार्टमेंट तीन लाख करोड़ रुपये के डिपॉजिट पर टैक्स लगाने और उसे वसूलने पर जोर फिर बढ़ा सकता है। ऐसा संदेह जताया गया था कि नोटबंदी के बाद बैंकों में करीब तीन लाख करोड़ रुपये की ऐसी रकम जमा की गई जिसके स्रोत की तस्वीर साफ नहीं है।
टैक्स विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि सर्च, सर्वे, इन्फॉर्मेशन वेरिफिकेशन से लेकर फॉलो-अप तक कई कदम उठाए जाएंगे। बड़े कारोबारियों और ज्वैलर्स से ही नहीं बल्कि कई तरह के असेसीज से कैश इन हैंड अमाउंट के बारे में स्पष्टीकरण मांगा जा रहा है। टारगेट पूरा हो जाने पर भी हम अभियान जारी रखेंगे। टैक्स अधिकारियों के साथ हाल में हुई विडियो कॉन्फ्रेंसिंग में सीबीडीटी के चीफ ने अधिकारियों को आगाह किया था। डिपार्टमेंट के एक अन्य अधिकारी के अनुसार, विभिन्न सर्कलों के डायरेक्ट टैक्स ऑफिसों को काफी जोर लगाना पड़ सकता है, क्योंकि टैक्स रेट्स में कमी और रिफंड्स के बाद जीएसटी कलेक्शन में कमी आई है। अब तक डिपार्टमेंट में कई लोग सितंबर 2015 (वित्त वर्ष 2014-15 के लिए) में भेजे गए नोटिसों से जुड़े असेसमेंट में जुटे थे, क्योंकि इन मामलों के लिए दिसंबर 2017 में समयसीमा तय कर दी गई थी। अब टैक्स अधिकारियों के पास रिकवरी पर फोकस करने के लिए 31 मार्च तक का वक्त होगा।
चार्टर्ड अकाउंटेंट निमेष खन्ना ने कहा कि इनकम टैक्स रिफंड में संभावित कमी, सीआईटी अपीलों के निस्तारण का निर्देश देने, नोटबंदी में रद्द घोषित नोटों में 10 लाख रुपये से ज्यादा का डिपॉजिट करनेवाले असेसीज के मामलों की जांच से ग्रॉस कलेक्शन बढ़ सकता है। हालांकि यह देखना होगा कि जीडीपी ग्रोथ रेट में कमी आने की बात मान ली गई है तो ऐसी सुस्त इकॉनमी में इन सब चीजों से टैक्स कलेक्शन बढ़ेगा या नहीं। विभाग के मुखिया ने इनकम टैक्स (अपील) कमिश्नरों को पत्र भेजकर कहा है कि मौजूदा वित्त वर्ष पूरा होने से पहले वे तमाम अपीलों का निस्तारण कर दें। इनकम टैक्स कमिश्नर पहली अपेलट अथॉरिटी होता है। टैक्स अथॉरिटीज के पास तकनीकी रूप से उन लोगों पर कड़ी कार्रवाई करने का अधिकार होता है जो अपने कैश डिपॉजिट के बारे में सही जानकारी नहीं दे पाएं। ऐसे लोगों पर वे 60 पर्सेंट टैक्स और पेनल्टी लगा सकते हैं। हालांकि इस प्रक्रिया में कुछ वक्त लग सकता है।
बता दें कि करीब दो महीने पहले टैक्स कार्यालयों को निर्देश दिया गया था कि वे उन्हीं संशोधित टैक्स रिटर्न को स्वीकार करें जिनमें ‘अनजाने में चूक होने की बात वैध लग रही हो’ या असेसी की ओर से ‘गलती’ हो गई हो। यह निर्देश उस अनअकाउंटेड कैश पर टैक्स लगाने के लिए दिया गया था जिसे नोटबंदी के बाद जमा किया गया हो और जिसके बारे में जानकारी बाद में रिवाइज्ड रिटर्न के जरिए देकर और उस पर 30 पर्सेंट की सामान्य दर से टैक्स चुकाकर उसे रेग्युलराइज कर लिया गया हो। हालांकि टैक्स अधिकारियों को दिया गया संदेश सुझाव की तरह ही है, क्योंकि कानून विभिन्न कारणों से रिवाइज्ड रिटर्न भरने की इजाजत देता है।

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