वाइब्रेंट चंबल चैलेंज अल्ट्रा मैराथन ले. कर्नल स्वरुप सिंह ने जीती

मैराथन में 500 से अधिक धावकों ने लिया था भाग

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झाँसी। राजस्थान के कोटा में छह जनवरी को आयोजित वाइब्रेंट चंबल चैलेंज अल्ट्रा मैराथन मथुरा के लें. कर्नल स्वरुप सिंह कुन्तल ने जीती। इस अल्ट्रा मैराथन में 63 किमी. 50 किमी. एवं 30 किमी. की तीन कैटेगरी थी। इस अल्ट्रा मैराथन में देश के 45 शहरों से 500 से अधिक धावकों ने हिस्सा लिया। इस अल्ट्रा मैराथन में कई अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर पदक जीत चुके धावक भी शामिल हुए।

63 किमी. की अल्ट्रा मैराथन का रुट कोटा से शुरु होकर रावतभाटा तक है। यह रुट हैंगिग ब्रिज से होते हुए प्रसिद्ध गरडिया महादेव मंदिर, चंबल पर बने जवाहर सागर बांध बोराबास वाइल्ड लाइफ सेंचुरी से होते हुए महाराणा प्रताप सागर बॉंध, रावत भाटा में समाप्त होता है। यह दुर्गम एवं उतार- चढ़ाव भरे पहाड़ी एवं जंगली रास्ते से गुजरता है जो धावक की हर तरह से परीक्षा लेता है। मथुरा के ले. कर्नल स्वरुप सिंह कुन्तल ने यह 63 किमी की अल्ट्रा मैराथन 5 घंटे 39 मिनट में पूरी करके प्रथम स्थान प्राप्त किया। शाम को आयोजित अवार्ड सेरेमनी में कोटा के कलेक्टर मुक्तानंद अग्रवाल ने मैडल एवं पुरस्कार प्रदान किया। इससे पूर्व गतवर्ष सितंबर माह में ले. कर्नल स्वरुप सिंह कुन्तल ने जयपुर इंटर नेशनल ट्राइथलॉन में 12 घंटे 23 मिनट में 3800 मी. स्वीमिंग, 182 किमी साइक्लिंग एवं 42 किमी. दौड़ लगाकर प्रथम स्थान प्राप्त कर आयरनमैन का खिताब जीता था। ले. कर्नल कुन्तल ने नवंबर माह में कुरुक्षेत्र में आयोजित 23 वीं रोड साइक्लिंग चै िपयनशिप में उत्तर प्रदेश की टीम का प्रतिनिधित्व किया था। ले. कर्नल कुंतल एक आयरनमैन, अल्ट्रा मैराथन, नेशनल लेवल साइक्लिस्ट होने के साथ पैरा कमाण्डों भी है। वर्तमान में यह व्हाइट टाइगर डिवीजन की व्हाइट टाइगर ईगल बटालियन झाँसी में तैनात है। इन्होंने अपनी बटालियन एवं डिवीजन के संसाधनों का भरपूर प्रयोग करते हुए झाँसी में रहकर तैयारी की।

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